
अजमेर, 15 अक्टूबर। उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर इंडिया गेट पर शांतिपूर्वक धरने पर बैठे अंकिता के माता-पिता को तड़के चार बजे पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना पर अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. राजकुमार जयपाल ने इस कार्रवाई को संवेदनहीनता और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति अनादर का प्रतीक बताया। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश गुप्ता ने इसे न्याय की मांग कर रहे पीड़ित परिवार की आवाज दबाने का प्रयास करार दिया।
डॉ. राजकुमार जयपाल ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उनकी पीड़ा सुनने और उनकी आशंकाओं का समाधान करने के बजाय उन्हें तड़के हिरासत में लिया जाना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर परिवार सवाल उठा रहा है, इसलिए सरकार को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ सामने आना चाहिए। न्याय की मांग कर रहे माता-पिता के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर न्याय की मांग कर रहे माता-पिता को सुबह चार बजे हिरासत में लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या भाजपा सरकार को एक पीड़ित परिवार की शांतिपूर्ण आवाज भी असहनीय लगने लगी है? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। किसी भी सरकार को पुलिस कार्रवाई के माध्यम से इस अधिकार को दबाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
न्याय की मांग करना अपराध नहीं
डॉ. जयपाल ने कहा कि भाजपा सरकार सत्ता के अहंकार में यह न भूले कि जनता सर्वोपरि है और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। आलोचना, सवाल और न्याय की मांग से बचने के बजाय सरकार को सामने आकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर या उन्हें डराकर जनभावनाओं को दबाया नहीं जा सकता। यदि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान नहीं किया गया और पीड़ित परिवार की आशंकाओं का समाधान नहीं हुआ, तो कांग्रेस इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगी।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की 19 वर्षीय युवती थीं, जो ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में स्वागतकर्मी के रूप में कार्यरत थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या का मामला सामने आया था। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
प्रेस नोट के अनुसार, अंकिता के माता-पिता मामले में कथित वीआईपी की भूमिका और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की मांग कर रहे हैं। परिवार की मांग है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
शैलेश गुप्ता ने भी कार्रवाई की निंदा की
कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश गुप्ता ने कहा कि अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे माता-पिता को तड़के चार बजे पुलिस द्वारा हिरासत में लिया जाना बेहद निंदनीय है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि शांतिपूर्वक न्याय की मांग कर रहे परिवार के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी की जागीर नहीं है और सत्ता के बल पर जनता की आवाज को कुचला नहीं जा सकता। सरकार की नीतियों का विरोध करना और न्याय की मांग करना नागरिकों का अधिकार है। यदि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों के साथ दमनकारी रवैया अपनाया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
कांग्रेस ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
डॉ. राजकुमार जयपाल ने मांग की कि अंकिता भंडारी के परिवार की मांगों को गंभीरता से सुना जाए, मामले से जुड़े शेष सवालों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए और परिवार की मांग के अनुरूप दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर सीबीआई जांच पूरी होने तक रोक लगाने के विषय पर विचार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय की मांग कर रहे माता-पिता के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए।
दोनों नेताओं ने कहा कि कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है और जब तक परिवार के सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं होता, तब तक इस मुद्दे को उठाती रहेगी। शैलेश गुप्ता ने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन लोकतंत्र, न्याय और जनता के अधिकार सर्वोपरि हैं। कांग्रेस न्याय की आवाज दबाने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगी।
नोट: यह समाचार उपलब्ध प्रेस नोट के आधार पर तैयार किया गया है। हिरासत की घटना, संबंधित मांगों और आरोपों के स्वतंत्र सत्यापन के बाद ही इन्हें पुष्ट तथ्य के रूप में प्रकाशित करना उचित होगा।




