
श्रीगंगानगर (संजय बिश्नोई)। गजसिंहपुर नगरपालिका में पिछले कई दिनों से चल रहे विवाद में आखिरकार राजीनामे पर सहमति बनने की बात सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में नई चर्चा छिड़ गई है। नगरपालिका अध्यक्ष संदीप पेड़ीवाल और पार्षदों के खिलाफ अधिशासी अधिकारी लाजपत बिश्नोई की शिकायत पर दर्ज मुकदमों को लेकर शुरू हुआ विवाद बाजार बंद और जनविरोध तक पहुंच गया था। अब समझौते की सहमति ने जहां विवाद के शांत होने की उम्मीद जगाई है, वहीं अधिशासी अधिकारी की कार्यशैली और पुलिस की भूमिका को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह नहीं कि राजीनामा हो गया, सवाल यह है कि मुकदमे करवाने की नौबत क्यों आई । नगरपालिका में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारी के बीच शुरू हुआ टकराव आखिर सड़क तक कैसे पहुंच गया? क्या इस विवाद को बातचीत के माध्यम से पहले ही सुलझाया नहीं जा सकता था? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अधिशासी अधिकारी की शिकायत पर नगरपालिका अध्यक्ष और पार्षदों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए, क्या अब वही अधिकारी उन्हीं जनप्रतिनिधियों के साथ तालमेल बैठाकर शहर के विकास कार्यों को आगे बढ़ा पाएंगे? क्या चेयरमैन और पार्षद ऐसे अधिशासी अधिकारी पर दोबारा भरोसा कर पाएंगे? या फिर समझौते के बाद भी नगरपालिका में अंदरूनी खींचतान जारी रहेगी?
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल, क्या मुकदमे दर्ज करने से पहले हुई थी निष्पक्ष जांच?
इस पूरे घटनाक्रम में गजसिंहपुर पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों में पुलिस ने किन तथ्यों और साक्ष्यों को आधार बनाया था? क्या दोनों पक्षों की बात सुनी गई थी? क्या मामले में किसी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव था? हालांकि पुलिस की किसी प्रकार की मिलीभगत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अब राजीनामे पर सहमति बनने की बात सामने आने के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि यदि विवाद बातचीत से सुलझ सकता था, तो मामला मुकदमों और बाजार बंद तक क्यों पहुंचा? बाजार बंद ने बदला घटनाक्रम, जनता की एकजुटता के बाद समझौते की पहल!
नगरपालिका अध्यक्ष और पार्षदों के खिलाफ मुकदमों के विरोध में गजसिंहपुर के व्यापारियों, विभिन्न संगठनों और शहरवासियों ने बाजार बंद का समर्थन कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। मामला केवल नगरपालिका कार्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर की सड़कों पर पहुंच गया। श्रीकरणपुर विधायक रूपिंद्र सिंह कुन्नर भी इस प्रकरण को लेकर जिला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचे थे और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।
अब राजीनामे पर सहमति की खबर ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।
क्या अधिशासी अधिकारी का तबादला मांगेंगे चेयरमैन और पार्षद?
समझौते के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल अधिशासी अधिकारी लाजपत बिश्नोई के भविष्य को लेकर खड़ा हो गया है। क्या नगरपालिका अध्यक्ष संदीप पेड़ीवाल और पार्षद पुरानी बातों को भुलाकर उनके साथ काम करेंगे? क्या राज्य सरकार से अधिशासी अधिकारी के स्थानांतरण की मांग उठेगी? या फिर दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के आधार पर नगरपालिका का कामकाज पहले की तरह चलता रहेगा?
इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा।
जनता पूछ रही है—जब आखिर में समझौता ही करना था, तो शहर को आंदोलन और बाजार बंद की स्थिति तक क्यों पहुंचाया गया?
गजसिंहपुर की जनता अब केवल राजीनामा नहीं, बल्कि पूरे विवाद की वास्तविकता भी जानना चाहती है। क्योंकि नगरपालिका किसी अधिकारी या राजनीतिक दल की निजी संस्था नहीं, बल्कि शहर की जनता के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए बनी संस्था है। अब देखना होगा कि राजीनामे की यह सहमति गजसिंहपुर नगरपालिका में विकास का नया रास्ता खोलती है या फिर आने वाले दिनों में अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव का नया अध्याय शुरू होता है।




