दीपावली पर रायसिंहनगर शहर की रौनक पर नगरपालिका की सख्ती का साया! पहले रेहड़ियों पर पाबंदी, अब पटाखा बाजार भी शहर से बाहर लगाने की तैयारी
किसानों की फसलें बर्बाद होने से पहले ही बाजार में मंदी, अब महात्मा गांधी स्कूल मैदान में पटाखा दुकानें लगाने की तैयारी से व्यापारियों की चिंता बढ़ी

श्रीगंगानगर (संजय बिश्नोई)। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही जहां बाजारों में रौनक बढ़नी चाहिए, वहीं रायसिंहनगर नगरपालिका के फैसलों को लेकर व्यापारियों में चिंता बढ़ती नजर आ रही है। एक तरफ क्षेत्र में किसानों की फसलें बर्बाद होने से बाजार में पहले ही आर्थिक मंदी का माहौल बना हुआ है, दूसरी तरफ नगरपालिका की सख्ती छोटे दुकानदारों, सब्जी रेहड़ी संचालकों और अब पटाखा विक्रेताओं के लिए परेशानी का कारण बन सकती है नगरपालिका की ओर से पूर्व में शहर में मुनादी करवाकर दुकानदारों को दुकानों के आगे सामान नहीं रखने तथा सब्जी रेहड़ी संचालकों को निर्धारित व्यवस्था का पालन करने की चेतावनी दी गई थी। नियमों का उल्लंघन करने पर पेनल्टी लगाने की बात भी कही गई। अब दीपावली पर पटाखा बाजार को लेकर नगरपालिका की नई व्यवस्था चर्चा का विषय बन गई है।
शहर में नहीं, महात्मा गांधी स्कूल के मैदान में लगेगा पटाखा बाजार!
जानकारी के अनुसार नगरपालिका की ओर से उपखंड अधिकारी को पत्र जारी कर महात्मा गांधी गवर्नमेंट स्कूल के मैदान में अस्थायी पटाखा दुकानें लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए पटाखा विक्रेताओं के लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया भी चल रही है। हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से पटाखों की बिक्री के लिए निर्धारित स्थान होना आवश्यक है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या नगरपालिका ने स्थान निर्धारित करने से पहले पटाखा विक्रेताओं के व्यापारिक हितों और ग्राहकों की सुविधा पर भी विचार किया है? व्यापारियों को आशंका, कहीं 90 प्रतिशत तक न गिर जाए बिक्री! पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों के सामने सबसे बड़ी चिंता ग्राहकों की आवाजाही को लेकर है। सामान्यतः दीपावली के दौरान मुख्य बाजार में खरीदारी करने आने वाले ग्राहक अन्य सामान के साथ पटाखों की खरीदारी भी कर लेते हैं। ऐसे में पटाखा बाजार को मुख्य बाजार से अलग स्कूल मैदान में लगाने पर विक्रेताओं को बिक्री प्रभावित होने की आशंका है। व्यापारिक हलकों में यहां तक चिंता जताई जा रही है कि ग्राहकों की पर्याप्त आवाजाही नहीं हुई तो बिक्री में भारी गिरावट आ सकती है। हालांकि 90 प्रतिशत तक बिक्री घटने की आशंका का कोई आधिकारिक आकलन सामने नहीं आया है।
किसान की जेब खाली तो बाजार में कहां से आएगी रौनक?
रायसिंहनगर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। इस बार किसानों की फसलों को हुए नुकसान का सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ने की आशंका है। किसान की जेब में पैसा होगा तभी कपड़ा, मिठाई, किराना, सजावट और पटाखा व्यापारियों के यहां ग्राहक पहुंचेंगे।
ऐसे समय में छोटे व्यापारियों को राहत देने के बजाय लगातार सख्त व्यवस्थाएं लागू करने से नगरपालिका की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुरक्षा भी जरूरी, लेकिन छोटे व्यापारियों का रोजगार भी देखे नगरपालिका
यहां सवाल पटाखों की दुकानों को नियमों के विरुद्ध मुख्य बाजार में लगाने का नहीं है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन व्यापारियों से बातचीत कर ऐसा सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान निर्धारित नहीं कर सकता, जहां अग्निशमन व्यवस्था, पर्याप्त खुला स्थान और सुरक्षा मानकों का पालन होने के साथ ग्राहकों की आवाजाही भी बनी रहे? नगरपालिका को चाहिए कि पटाखा विक्रेताओं और व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुने, ताकि दीपावली पर किसी छोटे व्यापारी को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
सबसे बड़ा सवाल — नगरपालिका शहर को व्यवस्थित करना चाहती है या दीपावली पर बाजार की बची-खुची रौनक भी खत्म हो जाएगी? अब देखना होगा कि नगरपालिका प्रशासन व्यापारियों की चिंताओं पर विचार करता है या पटाखा विक्रेताओं को निर्धारित स्कूल मैदान में ही अपनी दुकानें लगानी पड़ेंगी।



