रायसिंहनगर (जिला संवाददाता संजय बिश्नोई)शहर के बीचों-बीच स्थित रेलवे फाटक संख्या 36-सी की जगह वर्ष 2013 में बनाया गया रेलवे अंडरब्रिज आज भी आमजन के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। करीब 13 वर्ष बीत जाने के बावजूद अंडरब्रिज से जुड़ा विवाद नहीं सुलझ पाया है। इसका खामियाजा प्रतिदिन मुख्य बाजार आने-जाने वाले वाहन चालकों, दुकानदारों और आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में अंडरब्रिज का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन इसी दौरान एक पेट्रोल पंप मालिक द्वारा न्यायालय से यथास्थिति बनाए रखने का स्थगन आदेश प्राप्त किए जाने के कारण निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया। बताया जा रहा है कि अंडरब्रिज की एक तरफ की दीवार का कार्य अधूरा रह गया, जिसके चलते रास्ते की चौड़ाई प्रभावित हुई। पहले निर्माण रुका, फिर कचरे ने निगल लिया रास्ता! हैरानी की बात यह है कि वर्षों तक समस्या का स्थायी समाधान निकालने के बजाय संबंधित स्थान पर धीरे-धीरे कचरा डाले जाने से रास्ता और अधिक संकरा होता चला गया। स्थिति यह हो गई कि मुख्य बाजार की ओर जाने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर दो वाहनों का एक साथ निकलना भी मुश्किल होने लगा। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार नगरपालिका द्वारा हाल ही में उक्त स्थान पर सफाई कार्य करवाया जा रहा था, लेकिन यथास्थिति के न्यायालयीन आदेश का हवाला देते हुए सफाई कार्य भी रुकवा दिया गया।ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या न्यायालय के आदेश के दायरे में नियमित सफाई व्यवस्था भी आती है नगरपालिका प्रशासन को इस संबंध में न्यायालय से स्थिति स्पष्ट करवाने की पहल नहीं करनी चाहिए रेलवे अंडरब्रिज शहर के मुख्य बाजार तक पहुंचने का महत्वपूर्ण रास्ता है। रास्ता संकरा होने के कारण सामने से एक बड़ा वाहन आ जाने पर यातायात बाधित हो जाता है। कई बार वाहन चालकों को लंबे समय तक जाम में फंसे रहना पड़ता है। इस समस्या से न केवल आम नागरिक परेशान हैं, बल्कि बाजार के व्यापारियों और आसपास के दुकानदारों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अंडरब्रिज का निर्माण शहरवासियों को रेलवे फाटक की परेशानी से निजात दिलाने के लिए किया गया था, वही आज परेशानी का कारण क्यों बना हुआ है? क्या नगरपालिका और रेलवे विभाग संयुक्त रूप से इस मामले में न्यायालय के आदेश की समीक्षा करवाकर कोई वैकल्पिक समाधान नहीं निकाल सकते? क्या जनहित में रास्ते की सफाई और यातायात व्यवस्था सुचारू करने के लिए आवश्यक कानूनी पहल नहीं की जा सकती?
प्रशासन से पांच बड़े सवाल
1. वर्ष 2013 से अटका अंडरब्रिज का मामला आज तक क्यों नहीं सुलझ पाया?
2. क्या रेलवे और नगरपालिका ने न्यायालय में जनहित को देखते हुए कोई प्रभावी पैरवी की?
3. रास्ते पर जमा कचरे और अतिक्रमण जैसी स्थिति के संबंध में जिम्मेदारी किसकी है?
4. क्या न्यायालय से अनुमति लेकर सफाई और यातायात व्यवस्था सुचारू नहीं करवाई जा सकती?
5. आखिर शहरवासियों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा?
13 साल का इंतजार, अब समाधान चाहता है रायसिंहनगर!
शहरवासियों के लिए यह केवल एक अंडरब्रिज का मामला नहीं, बल्कि प्रतिदिन की आवाजाही और सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। जरूरत है कि नगरपालिका, रेलवे विभाग और स्थानीय प्रशासन आपसी समन्वय स्थापित कर न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए समस्या का स्थायी समाधान निकालें। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी जनहित में पहल करते हैं या फिर रायसिंहनगर की जनता को इसी प्रकार संकरे रास्ते और लंबे जाम की समस्या से जूझना पड़ेगा।



