हजरत हमीदुद्दीन नागौरी के 775वें उर्स में पहुंचे अब्दुल हकीम खान, दरगाह सदर शमशेर खान ने किया इस्तकबाल

नागौर, 14 अक्टूबर। विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागौरी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के 775वें उर्स मुबारक के मौके पर नागौर स्थित दरगाह शरीफ में अकीदतमंदों और गणमान्य लोगों की भीड़ उमड़ी।
इस अवसर पर राजस्थान स्टेट हज कमेटी के निवर्तमान सदस्य अब्दुल हकीम खान ने दरगाह शरीफ पहुंचकर उर्स में शिरकत की। उनके साथ हाजी महमूद खान, अख्तर साहब, शब्बीर खान और युवा नेता वसीम खान भी मौजूद रहे।

दरगाह शरीफ पहुंचने पर दरगाह कमेटी के सदर शमशेर खान ने सभी अतिथियों का दस्तारबंदी कर गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। इस दौरान मेहमानों ने आस्ताना-ए-आलिया पर मखमली चादर और अकीदत के फूल पेश किए तथा देश और प्रदेश में अमन-चैन, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए दुआ मांगी।
सादगी और सूफी परंपरा की मिसाल
हजरत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागौरी चिश्ती को ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह के प्रमुख खलीफाओं में माना जाता है। उनकी सादगी, इबादत और त्याग के कारण उन्हें ‘सुल्तानुत तारिकीन’ की उपाधि से नवाजा गया।
हजरत नागौरी साहब ने बेहद सादा जीवन व्यतीत किया और खेती को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाया। उनके जीवन में सादगी, मेहनत, त्याग और इंसानियत की सेवा का विशेष महत्व रहा।
उर्स के दौरान दरगाह में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे जायरीन ने अपनी अकीदत पेश की। दरगाह को सांप्रदायिक सौहार्द, रूहानियत और कौमी एकता के प्रमुख केंद्रों में माना जाता है।
इस मौके पर दरगाह सदर शमशेर खान और अन्य अतिथियों ने कहा कि सूफी संतों की शिक्षाएं समाज को जोड़ने, नफरत मिटाने और इंसानियत से मोहब्बत का संदेश देती हैं। आज के दौर में इन शिक्षाओं को अपनाना और भी जरूरी है।



