व्यापारियों, धानक तोला और मजदूरों ने दिया समर्थन; एफआईआर की निष्पक्ष जांच की मांग, पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
श्रीगंगानगर (संजय बिश्नोई)। गजसिंहपुर नगरपालिका का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी (ईओ) लाजपत बिश्नोई के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। नगरपालिका अध्यक्ष संदीप पेड़ीवाल और पार्षदों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में सोमवार को गजसिंहपुर मंडी बंद रखने का ऐलान किया गया है। बंद को व्यापारियों, धानक तोला और मजदूरों की ओर से समर्थन देने की घोषणा के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। अब पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं इस विवाद में पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। आरोप लगाया जा रहा है कि मनरेगा मजदूरों ने कथित अभद्र व्यवहार और प्रताड़ना को लेकर पुलिस थाने में परिवाद दिया था, लेकिन उस पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। वहीं, नगरपालिका ईओ की ओर से परिवाद दिए जाने के बाद पालिका अध्यक्ष और पार्षदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से पुलिस की कार्रवाई में कथित भेदभाव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि दोनों पक्षों की शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायतों पर कार्रवाई के अलग-अलग मानदंड तो नहीं अपनाए गए पालिका अध्यक्ष संदीप पेड़ीवाल ने आरोप लगाया कि ईओ लाजपत बिश्नोई की कार्यशैली के कारण मंडी के व्यापारियों और आमजन से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने ईओ के नियमित रूप से कार्यालय नहीं आने और मुख्यालय पर उपलब्ध नहीं रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मुख्यालय पर नियुक्त कुछ कर्मचारियों के कथित तौर पर अन्य स्थानों पर रहने के मामले में भी जांच और कार्रवाई की मांग उठाई। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। एफआईआर प्रकरण को लेकर नगरपालिका अध्यक्ष संदीप पेड़ीवाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष, विधायक रूपिंदर सिंह कुन्नर और कांग्रेस पार्षदों ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने पालिका अध्यक्ष और पार्षदों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष जांच करवाने तथा जांच अधिकारी बदलने की मांग रखी गजसिंहपुर में नगरपालिका का विवाद अब केवल पालिका प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है। मंडी बंद के ऐलान और विभिन्न वर्गों के समर्थन के बाद सोमवार को बाजार की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी। अब बड़ा सवाल यह है कि मनरेगा मजदूरों के परिवाद पर क्या कार्रवाई हुई, ईओ के परिवाद पर एफआईआर किन आधारों पर दर्ज की गई और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कब शुरू होगी? प्रशासन की कार्रवाई और पुलिस की जांच से ही इन सवालों के जवाब सामने आएंगे।



