गजसिंहपुर( संजय बिश्नोई)गजसिंहपुर से बॉर्डर की ओर जाने वाली सड़क की खस्ताहाल स्थिति एक बार फिर हादसे का कारण बन गई। गांव 2 एफएफबी के नजदीक सरकारी यूरिया खाद से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, अन्यथा लापरवाही का खामियाजा किसी निर्दोष को अपनी जान देकर भुगतना पड़ सकता था। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो सरकारी यूरिया खाद पहले ट्रकों के माध्यम से परिवहन की जाती थी, वह अब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में क्यों ढोई जा रही है? क्या परिवहन के दौरान निर्धारित भार क्षमता और सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा है? ओवरलोडिंग की आशंका को लेकर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। गजसिंहपुर से बॉर्डर की ओर जाने वाली सड़क लंबे समय से बदहाली का शिकार है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग पर आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है। हैरानी की बात यह है कि वर्तमान विधायक और सांसद भी इस मार्ग से गुजर चुके हैं, लेकिन सड़क की हालत में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। आखिर जनप्रतिनिधियों को इस सड़क की बदहाली क्यों दिखाई नहीं देती सरकार एक ओर विकास और बेहतर सड़क सुविधाओं के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर सीमावर्ती क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? सरकारी खाद के परिवहन में ओवरलोडिंग की जांच कौन करेगा? खस्ताहाल सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी कौन लेगा आज ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी है, कल किसी निर्दोष की जान भी जा सकती है। आखिर तब जिम्मेदारी कौन लेगा—संबंधित विभाग, प्रशासन या क्षेत्र के जनप्रतिनिधि क्षेत्रवासियों की मांग है कि गजसिंहपुर-बॉर्डर रोड की तत्काल मरम्मत करवाई जाए और सरकारी यूरिया खाद के परिवहन में सुरक्षा नियमों की जांच की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके।



