कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से आएगा बदलाव, किसानों को मिलेंगी आधुनिक तकनीक आधारित सेवाएं
13 जिलों के कृषि अधिकारियों को वाधवानी एआई के विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण, खेत से बाजार तक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की तैयारी
जयपुर/अजमेर। प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, नवाचार और आंकड़ों पर आधारित निर्णय प्रणाली से जोड़ने के लिए कृषि विभाग की ओर से पहल की जा रही है। इसी क्रम में पंत कृषि भवन में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें वाधवानी इंस्टीट्यूट फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञों ने 13 जिलों के कृषि अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग, संभावनाओं और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के संबंध में प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला का उद्देश्य कृषि अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना तथा कृषि प्रशासन, योजनाओं के निर्माण, निगरानी, निर्णय प्रक्रिया और किसान सेवाओं में एआई के प्रभावी उपयोग की संभावनाओं को समझाना था। विभाग का लक्ष्य इस तकनीक को केवल प्रयोग तक सीमित न रखकर कृषि व्यवस्था और किसानों को दी जाने वाली सेवाओं से जोड़ना है।
किसानों को मिलेगा आधुनिक तकनीक का लाभ
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल विभागीय कार्यों तक सीमित नहीं है। इस तकनीक का लाभ किसानों तक पहुंचाने से कृषि को अधिक आधुनिक, लाभकारी, टिकाऊ और जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि बुवाई से लेकर कटाई और उपज के विपणन तक कृषि की पूरी प्रक्रिया में एआई आधारित तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इसके माध्यम से मौसम आधारित कृषि सलाह, फसल की स्थिति का आकलन, कीट एवं रोगों की पहचान, उत्पादन का पूर्वानुमान, सिंचाई और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तथा बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।
मौसम और फसल संबंधी निर्णय होंगे अधिक सटीक
कृषि, मौसम और फसलों से जुड़े आंकड़ों का कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं आंकड़ा विश्लेषण तकनीक के माध्यम से अध्ययन कर किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समयबद्ध और सटीक सलाह उपलब्ध कराने की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
मौसम के पूर्वानुमान और खेतों में फसल की वास्तविक स्थिति के आधार पर किसानों को बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण और कटाई जैसे महत्वपूर्ण कृषि कार्यों के संबंध में समय पर निर्णय लेने में मदद मिल सकेगी। इससे उत्पादन लागत नियंत्रित करने, कृषि जोखिम कम करने और फसल उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
कीट एवं रोगों की शुरुआती पहचान में मिलेगी मदद
एआई आधारित प्रणालियों के माध्यम से फसलों की नियमित निगरानी, कीट एवं रोगों की शुरुआती पहचान और संभावित उत्पादन का आकलन अधिक वैज्ञानिक तरीके से किया जा सकता है। इससे फसल में होने वाली समस्याओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक कदम उठाने में मदद मिल सकती है।
कृषि क्षेत्र में इस तकनीक के उपयोग से किसानों को खेत से लेकर बाजार तक बेहतर जानकारी और सलाह उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही कृषि प्रशासन में योजनाओं की निगरानी, आंकड़ों के विश्लेषण और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायता मिल सकती है।


