मूली की फसल को भूमिगत कीटों और रोगों से बचाने के उपाय बताए

अजमेर, 14 अक्टूबर। उद्यान विभाग की टीम ने पुष्कर क्षेत्र के भगवानपुरा, सूरजकुंड, पिचोलिया और सवाईपुरा गांवों का दौरा कर भूमिगत कीटों एवं रोगों से प्रभावित मूली की फसल का जायजा लिया। इस दौरान किसानों को फसल को कीटों और रोगों से बचाने के उपायों की जानकारी दी गई।
उप निदेशक उद्यान आरती यादव ने बताया कि भूमिगत कीटों से बचाव के लिए बुवाई से पहले अंतिम जुताई के समय कीटनाशक के उपयोग की सलाह दी गई है। वहीं, जड़ गलन एवं अन्य रोगों से बचाव के लिए बुवाई से पहले बीजोपचार करने तथा फसल में रोगों के लक्षण दिखाई देने पर उचित उपाय अपनाने की जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि खड़ी फसल में भूमिगत कीटों का प्रकोप दिखाई देने पर उनके नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है। जड़ गलन रोग के लक्षण दिखाई देने पर उचित फफूंदनाशक का छिड़काव करने तथा आवश्यकता पड़ने पर 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव करने की सलाह दी गई।
उद्यान विभाग ने किसानों से की फसल चक्र अपनाने की अपील
आरती यादव ने किसानों से मूली की फसल में नियमित रूप से फसल चक्र अपनाने की अपील की, ताकि भूमिगत कीटों एवं रोगों के प्रकोप को कम किया जा सके और फसल की गुणवत्ता बनाए रखी जा सके।
महत्वपूर्ण सावधानी: मूल प्रेस नोट में कुछ कीटनाशकों की मात्रा और उपयोग संबंधी निर्देश दिए गए हैं। रसायनों के उपयोग से पहले वर्तमान पंजीकरण, मूली की फसल के लिए स्वीकृत लेबल निर्देश और कृषि विशेषज्ञ की सलाह की पुष्टि अवश्य करें।




